ओबांगसेक: हनबोक के पाँच मूल रंग
हनबोक के पाँचों रंग किस-किस के प्रतीक हैं, और जोगोरी तथा चीमा पर उन्हें आपस में कैसे जोड़ा जाता है।
हनबोक का रंग सिर्फ़ पसंद का मामला नहीं है। नीला, लाल, पीला, सफ़ेद और काला — इनमें से हर रंग किसी एक दिशा, एक ऋतु और पंचतत्वों में से एक से जुड़ा था, और इस पूरी व्यवस्था को ओबांगसेक (오방색) यानी पाँच मूल रंग कहते हैं। एक बार यह पता चल जाए कि कौन सा रंग कहाँ बैठता है, तो जोगोरी (저고리, छोटी ऊपरी जैकेट) और चीमा (치마, लपेटदार स्कर्ट) का मेल कहीं ज़्यादा साफ़ दिखने लगता है।
पाँच रंग और उनकी दिशाएँ
कोरिया की सांस्कृतिक विरासत से जुड़े स्रोत इन्हें इस तरह समझाते हैं।
- चोंग (청), नीला-हरा: पूर्व, वसंत, काष्ठ — जहाँ सूरज उगता है और पेड़ सदा हरे रहते हैं।
- जोक (적), लाल: दक्षिण, ग्रीष्म, अग्नि — जहाँ सूरज सबसे तेज़ होता है।
- ह्वांग (황), पीला: केंद्र, ग्रीष्म का अंत, पृथ्वी — धरती का मध्य, और प्रकाश।
- बेक (백), सफ़ेद: पश्चिम, शरद, धातु — धातु में देखा गया रंग।
- हेउक (흑), काला: उत्तर, शीत, जल — गहरे पानी में देखा गया रंग।
शुद्ध रंग और मिश्रित रंग
ये पाँच ओजोंगसेक (오정색) यानी शुद्ध रंग कहलाते हैं। इन्हें आपस में मिलाने से ओगानसेक (오간색) बनते हैं: नोकसेक (녹색) हरा, होंगसेक (홍색) हल्का लाल, ब्योकसेक (벽색) फीका नीला, जासेक (자색) बैंगनी और युह्वांगसेक (유황색) गंधक जैसा मटमैला पीला। हरा पूर्व (काष्ठ) और केंद्र (पृथ्वी) के बीच बैठता है, बैंगनी दक्षिण (अग्नि) और उत्तर (जल) के बीच। शुद्ध रंग यांग माने जाते हैं और मिश्रित रंग यिन। बड़ों का हनबोक शायद ही कभी शुद्ध रंगों को सीधे इस्तेमाल करता है — उनकी संतृप्ति आम तौर पर एक-दो पायदान कम कर दी जाती है।
रंग क्या काम करते थे
रंग एक साथ पद भी बताता था और मनोकामना भी। पीला सम्राट का रंग था, इसलिए जोसोन के राजा लाल गोल्योंगपो (곤룡포) यानी राजा का ड्रैगन-चोगा पहनते थे, और पीला उन्होंने 1897 में कोरियाई साम्राज्य की घोषणा के बाद ही अपनाया। सरकारी पोशाक भी रंग से श्रेणीबद्ध थी — ब्यौरे हर काल में कुछ बदलते रहे, पर मोटे तौर पर सबसे ऊँचे पदों के लिए लाल, उससे नीचे नीला और सबसे निचले पदों के लिए हरा। लाल अशुभ को दूर भगाता था, इसीलिए दुल्हन योनजी गोनजी (연지곤지) लगाती थी — गालों और माथे पर लाल बिंदियाँ। सफ़ेद आम लोगों का रोज़मर्रा का रंग था। आस्तीन के सिरे पर लगे नील रंग के कफ़, नामसेक क्केउतदोंग (남색 끝동), के बारे में कहा जाता है कि यह उस स्त्री की पहचान थी जिसने बेटे को जन्म दिया हो।
रंगों का मेल कैसे बैठाया जाता है
- नोगुई-होंगसांग (녹의홍상): दाहोंग (다홍) यानी सुर्ख़ लाल चीमा के ऊपर योनदू (연두) यानी हल्के हरे रंग की जोगोरी — पूरक रंगों की यह जोड़ी नई दुल्हन या किसी उत्सव के दिन पहनी जाती है।
- होएजांग (회장) यानी विपरीत रंग की किनारी: बानहोएजांग (반회장) में दूसरा रंग सिर्फ़ कॉलर, कफ़ और डोरियों पर आता है; सामहोएजांग (삼회장) में ग्योनमागी (곁마기) यानी बग़ल के नीचे का पल्ला भी जुड़ जाता है।
- सेकदोंग (색동): रंगीन पट्टियों को जोड़कर बनाया गया आस्तीन का कपड़ा, जिसमें ज़्यादातर चार शुद्ध रंग — लाल, नीला, पीला और सफ़ेद — रहते हैं, और मिश्रित रंग कभी जोड़े जाते हैं तो कभी छोड़ दिए जाते हैं।
व्यावहारिक नियम यह है कि बड़े हिस्से सादे रखे जाएँ और तेज़ विरोधाभास थोड़ी-सी जगह में रहे। इसीलिए सेकदोंग कंधे से कफ़ तक चलता है जबकि पोशाक का बदन शांत बना रहता है। उम्र भी यह संतुलन बदल देती है: युवा तीखे मेल पहनते हैं, और बड़ी उम्र के लोग कम संतृप्ति वाले रंग।
यह क्षेत्र और परिवार के हिसाब से बदलता है
अकेले विवाह की पोशाक में ही फ़र्क़ मिलता है। गेसोंग में हल्के हरे रंग का बिना अस्तर का वोनसाम (원삼) यानी समारोही चोगा चलता था, लाल किनारी और सेकदोंग आस्तीनों के साथ; प्योंगयांग में नील रंग के कफ़ वाली हरी बानहोएजांग जोगोरी; और जोल्लाबुक-दो में लाल कॉलर और लाल डोरियों वाला नीला बिना अस्तर का वोनसाम। सेकदोंग की उत्पत्ति पर भी मतभेद है — एक मत इसे गोर्यो के भिक्षुओं से जोड़ता है, दूसरा पंचतत्वों को एक साथ जुटाकर अनिष्ट टालने की भावना से। ये मेल शरीर पर चलते-फिरते कैसे लगते हैं, यह देखने का सबसे तेज़ तरीक़ा है एक हनबोक पहनकर देख लेना।